100 दिन में शहर बदलने का संकेत
जयपुर में शहरी निकायों के नए प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत ने एक सरल-सा माहौल बनाया: अब बात केवल योजना की नहीं, ज़मीन पर काम की है। मुख्यमंत्री ने 100 दिन का लक्ष्य रखकर शहरों को तेज़ रफ़्तार से सुधारने का संकेत दिया, और इसमें सफाई, सड़क मरम्मत, पानी की पहुँच, स्ट्रीट लाइट और स्थानीय सेवाओं जैसे मुद्दे सीधे सामने आए। जयपुर जैसे शहर में लोग रोज़ के छोटे झंझट से ही शहर को परखते हैं—कचरा उठा या नहीं, गली में रोशनी है या नहीं, और दफ़्तर तक पहुँचने में कितना समय लगा। इसी वजह से यह 100 दिन वाली बात सिर्फ फ़ाइल का नंबर नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी की परीक्षा लगती है। नई टीम के लिए यह पहला इम्तिहान है, और शहर के लिए एक सीधी-सी उम्मीद: काम दिखे, और जल्दी दिखे।
