8वीं पास, फर्जी डिग्री और अस्पताल का खेल
जयपुर और जालोर के बीच चल रहा यह मामला घणो हैरान करने वाला है। SOG ने दो लोगों को पकड़ा है, जिन पर फर्जी चिकित्सा डिग्रियों और प्रमाणपत्रों के जरिए पंजीकरण लेने का आरोप है। एक व्यक्ति केवल 8वीं तक पढ़ा था, फिर भी 10-12वीं और स्त्री-रोग विशेषज्ञ डिप्लोमा जैसे कागज दिखाए गए। दूसरे ने विदेशी चिकित्सा योग्यता परीक्षा बार-बार असफल होने के बाद भी दूसरी राह से कागजी प्रवेश बनाने की कोशिश की। यही तो व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरी दिखाती है — जब कागज सच से ज्यादा तेज चलने लगें। जिस अस्पताल का जिक्र आ रहा है, वह भी इस पूरे मामले को और भारी बना देता है। सच्ची बात यह है कि चिकित्सा क्षेत्र में भरोसा सबसे पहली दवा होती है, और जब वही डगमगाए, तो सवाल घणे हो जाते हैं।
