आगळ: दरवाज़े का छोटा सा हीरो
दरवाज़े का जो छोटा सा डंडा होता है, उसे मारवाड़ी में आगळ कहते हैं। काम सीधा है: दरवाज़े के पल्लों को कसकर बंद रखना। गाँव के पुराने घरों में यह लकड़ी का टुकड़ा बड़ा काम का होता था, खासकर जब तेज हवा चले और छत की दीवार से टकराकर दरवाज़ा खुलने लगे। आगळ की बात में ही घर की आदत छुपी है—सब कुछ सीधा, काम का, बिना दिखावे के। म्हारे दादा बोलते थे, “आगळ लगा दियो, फिर सुकून से बैठो।” आज धातु की कुंडी मिल जाती है, पर आगळ जैसी बात कम ही मिलती है। छोटी सी चीज़, पर घर की सजगता का पूरा निशान।
