आज का मारवाड़ी शब्द: बधावो
शादी के बाद जब बेटी ससुराल जाती है, तब घर का माहौल सीधे बदल जाता है। उसी समय जो गीत गाया जाता है, उसे मारवाड़ी में बधावो कहते हैं। यह सिर्फ गाना नहीं, एक रीति है—जिसमें माँ की आँखों की नमी, दादी की दुआ और घर की खुशी सब एक साथ आ जाती हैं। जयपुर और आसपास के गाँवों में ऐसे गीत विदाई के पल को और गहरा बना देते हैं। बधावो में बेटी को प्यार से विदा किया जाता है, जैसे घर खुद बोल रहा हो। बोलने का तरीका सरल है: “आज रात बधावो गाएँगे।” इस एक शब्द में रिश्ते, यादें और घर की घणी महक समाई होती है।
