आकड़ो: वो झाड़ जो गाँव को याद रहे
आकड़ो, यानी आकड़ो, राजस्थान के खेत-खलिहान में मिलने वाला एक झाड़ है। इसके पत्ते बड़े होते हैं और गंध भी अलग सी होती है, इसलिए दूर से ही पहचान ली जाती है। कुछ लोग इसे दवाई के काम का पौधा भी मानते हैं, पर सीधे हाथ लगाना ठीक नहीं होता। मारवाड़ी में जब कोई बोले, “ओ आकड़ो जियो नाटक मत कर,” तो मतलब हुआ — बहुत अकड़ मत दिखा। छोटा सा शब्द है, पर इसमें गाँव की बोली, सीधी बात और थोड़ी नखरेली मुस्कान सब आ जाती है। घणी मस्त शब्द है, है ना?
