आंबली: खट्टी सी बात, गहरी याद
आंबली का नाम सुनते ही ज़ुबान पर खट्टापन आ जाता है, और घर का कोई पुराना स्वाद भी याद आ जाता है। राजस्थान में इमली को प्यार से आंबली बोलते हैं। चटनी, साग, खट्टी दाल या ठंडी छाछ — इसके बिना कई पकवान अधूरे लगते हैं। मारवाड़ी बात में एक छोटा सा जादू भी है: “थोड़ी आंबली डाल दे” का मतलब होता है, बस थोड़ा सा खट्टापन और रंग घोल दो। नानी के हाथ की आंबली वाली चटनी हो तो रोटी खुद बोल पड़ती है। घर की रसोई में ऐसे शब्द सिर्फ नाम नहीं होते, याद और स्वाद दोनों होते हैं। और सच्ची, इसी में राजस्थान की असली मिठास छुपी है।
