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मारवाड़ी मुक्तिMarwadi Mukti

आंतरो: छोटा लफ़्ज़, बड़ी काम की बात

Aantro: chhota lafz, badi kaam ki baat

आंतरो सुनते ही लगता है, अरे यह तो रोज़ की बात है। दो गलियों के बीच का फासला, बस आने का अंतराल, या किसी का फ़ोन करने और उठाने के बीच का समय — सब आंतरो ही है। जयपुर के बच्चे हों या मोहल्ले के चाचा, यह शब्द सीधे काम का है। मारवाड़ी में बोला जा सकता है: "स्कूल और घर में घणो आंतरो है।" इसमें न फ़ालतू झंझट, न भारी-भरकम बात। बस दूरी। ऐसे शब्द ही बोली को ज़िंदा रखते हैं, क्योंकि ये सीधे ज़िंदगी से उठते हैं। घणी सुंदर बात यह है कि एक छोटा-सा शब्द पूरी तस्वीर बना देता है।