अठवाड़ो: थाली का सबसे सच्चा शब्द
थाली खाली हो और परोसन में बस थोड़ा सा खाना बच जाए—मारवाड़ी में उसे अठवाड़ो कहते हैं। ये शब्द छोटो है, पर बात बड़ी है: घर के लोग इसे बचपन से सुनते आए हैं, जब दादी कहती थी, “अठवाड़ो मत छोड़ो, फेर काम आवेगा।” इसमें सिर्फ बचा हुआ खाना नहीं, घर की सावधानी और इज़्ज़त भी छुपी होती है। गाँव हो या शहर, राजस्थान में ऐसे शब्द रोज़ की ज़िंदगी को सीधा और प्यारा बनाते हैं। आज का शब्द याद रखो: अठवाड़ो = थाली में बचा हुआ खाना। बस, इतनी सी बात, पर कितनी अपनी लगती है।
