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मारवाड़ी मुक्तिMarwadi Mukti

आवजो: जब बुलाना ही अपनी बात हो

Aavjo: jab bulana hi apni baat ho

आवजो यानी “आइए” या “आओ” — पर मारवाड़ी में इसमें सिर्फ बुलावा नहीं, अपनापन भी छुपा होता है। घर के दरवाज़े पर कोई मेहमान हो, या मेला, शादी, छोटी सी चाय की महफ़िल हो, तो “आवजो” सीधे दिल तक पहुँचता है। जयपुर और आसपास की बोलचाल में यह शब्द नरम, सच्चा और घर जैसा लगता है। इसका प्रयोग आसान है: “कल शाम म्हारे घर आवजो।” मतलब, कल शाम घर ज़रूर आना। इसमें न ज़्यादा बनावट, न ज़्यादा भारीपन — बस प्यारा सा बुलावा। ऐसे शब्द ही बोली को जिंदा रखते हैं। घणी बात यही है: एक छोटा शब्द, और उसमें पूरा रिश्ता।