अडाणै: गिरवी रखने का मारवाड़ी शब्द
आज का शब्द है अडाणै, जो मारवाड़ी में तब बोला जाता है जब कोई चीज़ गिरवी या बंधक पर रख दी जाए। गाँव की ज़िंदगी में यह बात नई नहीं: कभी फसल का खर्च निकालना हो, कभी घर का काम, तो किसी के पास गहना या ज़मीन अडाणै चढ़ जाती है। इस शब्द में सीधी-सी सच्चाई है — पैसा तुरंत मिल जाता है, पर चीज़ अभी भी किसी और के हिसाब में होती है। म्हारे यहाँ कोई बोले, "वह कम्बल अडाणै है," तो मतलब साफ है: वह अभी पूरी तरह अपना नहीं रहा। मारवाड़ी का रंग भी यही है — छोटी-सी बात, पर पूरा जीवन समझा देती है।
