आगरा की पुरानी जमीन पर राजस्थान का नया दावा
आगरा में जो पुरानी संपत्तियों का मामला है, उसने एक बार फिर दिखाया कि इतिहास सिर्फ संग्रहालय में नहीं, फाइलों में भी साँस लेता है। राजस्थान सरकार ने 1952 के विलय समझौते को आधार मानकर अभिलेखों की गहरी जाँच शुरू की है, ताकि पता चले कौन-सी संपत्तियाँ राज्य से जुड़ी हुई थीं। यह काम सरल नहीं है, क्योंकि पुराने कागजों में कभी नाम बदला, कभी हिसाब, और कभी प्रविष्टि अधूरी रह गई। गली के कोने पर बैठकर लोग भी यही कह रहे हैं—पुरानी चीज़ का हिसाब निकालना हो तो पहले कागज सीधे करने पड़ते हैं। इस छानबीन से न सिर्फ स्वामित्व का सवाल साफ़ होगा, बल्कि विरासत को सँभालने का तरीका भी सामने आएगा। आगरा और राजस्थान के बीच का यह पुराना रिश्ता अब अभिलेखों के जरिए फिर से पढ़ने की कोशिश है।
