एआई निगरानी में 315 फर्जी उपचार दावे पकड़े
स्वास्थ्य भवन की फाइलों में इस बार कहानी क्लिनिक से ज़्यादा व्यवस्था की निकली। जिस चिकित्सक की सेवा समाप्त हो चुकी थी, उनके नाम से 315 उपचार विवरण भेजे गए। कागज़ पर सब ठीक लगता, पर एआई-आधारित निगरानी ने अभिलेखों के बीच का अंतर पकड़ लिया। यही तो नई बात है — अब दफ़्तर के हिसाब से नहीं, आँकड़ों के हिसाब से भी नज़र रखी जा रही है। जयपुर में स्वास्थ्य अभिलेखों का बोझ बड़ा है, और ऐसे में एक छोटा-सा असंतुलन भी पूरे हिसाब को हिला देता है। एक दफ़्तरी-सी बात कहें तो, व्यवस्था ने पहले ही बता दिया: भाई, यह प्रविष्टि सीधी नहीं बैठ रही। इस कार्रवाई का मतलब सिर्फ एक मामला नहीं, बल्कि पूरे अभिलेख-प्रबंधन पर सवाल है। घणी सच्ची बात है — जब मशीन पकड़ ले, तो कागज़ की चालाकी ज़्यादा देर टिकती नहीं।
