अनाण सनाण: पहचान का छोटा जादू
आज का मारवाड़ी-मुक्ति शब्द है **अनाण सनाण**। इसका मतलब होता है किसी चीज़ की वह अलग पहचान जो उसे बाकी सब से जुदा बनाए। मतलब सीधी बात: “यह चीज़ किस बात से अलग है?” जयपुर की गलियों में ऐसे शब्द रोज़ की बोली को थोड़ा और रंग देते हैं। जैसे कुल्फी का अनाण सनाण उसका तेज़ दूध और केसर वाला स्वाद हो सकता है, या किसी हाथ की बनी राजस्थानी रजाई का अनाण सनाण उसकी सिलाई। इसे ऐसे बोलो: “इस थाली का अनाण सनाण इसकी मसालेदार गट्टे की सब्ज़ी है।” घणी सरल, घणी काम की बात। ऐसे शब्द म्हारी बोली को और अपनी सी बना देते हैं।
