अरावली रिपोर्ट की समयसीमा पर नई मांग
अरावली का मामला सिर्फ कागज़ का नहीं, ज़मीन और गाँव की रोज़ी का भी है। इसी लिए विपक्ष के नेता ने सुप्रीम कोर्ट-नियुक्त उच्च-स्तरीय समिति से रिपोर्ट की समयसीमा बढ़ाने की माँग की है और साथ ही ग्रामीणों से संवाद पर ज़ोर दिया है। बात सीधी है: जो फैसला पहाड़ी इलाके को छू रहा है, उसमें वहाँ के लोगों की आवाज़ भी सुननी चाहिए। जयपुर से लेकर अरावली बेल्ट तक, लोग इसे एक आँकड़ों वाले सवाल की तरह देख रहे हैं — कितना क्षेत्र, कितनी रुकावट, और कितनी जल्दी जवाब। समिति का अगला कदम अब सबकी नज़र में है, क्योंकि समयसीमा से ज़्यादा मायने उस प्रक्रिया के हैं जो ज़मीनी सच्चाई को समझे।
