अरड़ाणो: गाय-भैंस की पुकार का शब्द
अरड़ाणो, यानी गाय-भैंस की पुकार, मारवाड़ी की उन बातों में से है जो गाँव की ज़िंदगी को सीधा पकड़ लेती हैं। सुबह चरवाहा जब धूप चढ़ने से पहले आवाज़ लगाता है, तो पशु बस उसी धुन को पहचान लेते हैं। जयपुर के आसपास के गाँवों में ऐसी बोली अब कम सुनाई देती है, इसलिए ये शब्द और भी ख़ास लगता है। इसका उपयोग सीधा है: “अरड़ाणो दियो, गाय अंदर आवेगी।” मतलब, पुकार दो, पशु आ जाएँगे। घणी सीधी बात, घणी काम की बात। ऐसे शब्द बस अर्थ नहीं, पूरा गाँव का रिदम साथ लाते हैं।
