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मारवाड़ी मुक्तिMarwadi Mukti

बागर: बाजरे के पूलों का सही ढेर

Baagar: bajre ke poola ka smart stack

बागर सिर्फ एक शब्द नहीं, गाँव की समझदारी और योजना का छोटा सा सबूत है। जब बाजरा कटता है, तो उसके पूलों को इधर-उधर नहीं छोड़ा जाता; उन्हें साफ तरह से ढेर करके रखा जाता है। इसी को बागर बोलते हैं। यह बात खासकर उन इलाकों में समझ आती है जहाँ बारिश का भरोसा कम और मेहनत का भरोसा ज्यादा होता है। मारवाड़ी में एक पंक्ति सुनो: “बागर ठीक है, तो सर्दी तक फिकर कम।” मतलब, जो बात संभालकर रखी जाए, वही काम आती है। घणी सीधी सी बात है, पर इसमें गाँव की समझ छिपी है। समझे?