बागर: बाजरे की वह याद जो संभाल कर रखी जाती है
बागर, मारवाड़ी का एक प्यारा सा शब्द है जो बाजरे की पूलों की बँधी गड्डियों के लिए बोला जाता है, जब उन्हें ठीक तरीके से साफ और संभालकर रखा जाए। गाँव में यह काम सिर्फ भंडारण नहीं, पूरी योजना होती है: कब काटना है, कैसे सुखाना है, और छत की दीवार के पास कौन सी जगह सुरक्षित रहेगी। घणी बार बागर देखकर ही पता चल जाता है कि घर में कितना अनाज बचेगा। मारवाड़ी में बोल सकते हैं, “बागर ठीक से बाँध दो, बारिश आ सकती है।” सच्ची, एक शब्द में पूरी खेती समझ आ जाती है।
