बाळ: बाल और जलने का मारवाड़ी शब्द
आज का मरवाड़ी-मुक्ति शब्द है बाळ। मारवाड़ी में इसका उपयोग दो तरह से होता है: एक, बाळ यानी बाल; दूसरा, जलना या झुलसना। यह छोटा सा शब्द घर की बोली में बहुत काम आता है, इसलिए सुनते ही याद रह जाता है। जयपुर की गली-मोहल्ले में कोई कहे, "म्हारे बाळ लंबे हैं," तो सीधी बात समझ आ जाती है। और अगर चूल्हे के पास हाथ छू गया, तो बोलेंगे, "हाथ बाळ गयो।" बस इतनी सी बात, पर कितनी सच्ची! मारवाड़ी की यही खूबी है: एक शब्द, दो अर्थ, और पूरी बोली में रंग। आज याद रखो — बाळ, मतलब बाल भी, जलना भी।
