बांच: पढ़ने वाला मारवाड़ी शब्द
बांच (बांच) मारवाड़ी का एक सीधा-सादा, काम का शब्द है: पढ़ना। जयपुर के घरों में सुना होगा, "म्हारी छोरी रोज शाम नूं किताब बांचती है।" इसमें न कोई भारीपन, न अकड़ — बस सीधी बात। गाँव में बड़े लोग भी कह देते थे, "थोड़ा बांच ले, समझ आवेगा।" आज के समय में यह सिर्फ किताब तक सीमित नहीं; सूचना, पोस्ट, या नया संदेश — सब बांचने की चीज़ है। मारवाड़ी की खूबी भी यही है: छोटे शब्द, पर सीधा निशाना। बांच ऐसा शब्द है जो याद रह जाता है, और काम भी आ जाता है। घणी सही, ना?
