बांटे: ज़मीन का वह शब्द जो काम का है
बांटे मारवाड़ी का वह सीधा-सादा शब्द है जो खेत और रोज़गार दोनों की बात कर देता है। मतलब: ज़मीन को पट्टे पर देना, या बटाई पर चलाना। गाँव में जब किसान बोलता है, "खेत बांटे पर है," तो समझ लो फ़सल का हिसाब बाँटकर होगा। इसमें मालिक और काम करने वाले के बीच एक सीधा समझौता होता है। यही इस शब्द की जान है — न ज़्यादा घुमाव, न भारी-भरकम। मारवाड़ की बोली में ऐसे शब्द सच्चे लगते हैं। छोटा सा प्रयोग: "म्हारे चाचा ने दो बीघा बांटे पर दिए।" घणी काम की बात, एक ही शब्द में।
