बांठ: जब बोझा भी अपना लगे
बांठ मारवाड़ी का वह सीधा-सा शब्द है जो तुरंत मतलब पकड़ा देता है: बोझा, बँधा हुआ सामान, या लदा हुआ भार। गाँव में जब किसी ने चारपाई पर गेहूँ का गट्ठा रखा, या ठेले पर ज़्यादा सामान चढ़ गया, लोग बोल देते हैं, ‘बांठ ज़्यादा हो गया।’ इसमें दिखावा नहीं, बस साफ़ बात है। इस शब्द की खूबी यह है कि यह काम की ज़बान से आता है — सीधा, छोटा, याद रहने वाला। जैसे: ‘म्हारे कंधे पर बांठ भारी है।’ यानी बोझा भारी है। आज का शब्द-ऑफ-द-डे इतना ही: बांठ = बोझा। घणी बार, एक छोटा शब्द ही पूरी बात समझा देता है, है न?
