बारै: घर से बाहर का अपना शब्द
बारै सुनते ही दिमाग में सीधा घर का आँगन, छत की दीवार, या गली का कोना आ जाता है। मारवाड़ी में इसका मतलब है “बाहर” — यानी बाहर। ये शब्द रोज़ की बात में घणा काम आता है। कोई बच्चा दरवाज़े पर खड़ा हो, तो दादी बोल सकती है, “बारै जा, धूल लगेगी।” इसका प्रयोग सीधा और प्यारा होता है, बिना अतिरिक्त झंझट के। मारवाड़ी की ये बात ही अलग है: एक छोटा सा शब्द, पर पूरा दृश्य समझा देता है। बारै आज का शब्द-ऑफ-द-डे है, और सच्ची, इसे बोलने में एक अपनापन सा लगता है।
