बच्योड़ा: मारवाड़ी में बचा हुआ हिस्सा
आज का मारवाड़ी-मुक्ति शब्द है बच्योड़ा, यानी जो चीज बची रह जाए: बचा हुआ हिस्सा, बाकी, या आख़िरी थोड़ा-सा भाग। जयपुर के घरों में यह शब्द सीधा और प्यारा लगता है, क्योंकि इसमें हवा भी है और हिसाब भी। मान लो कचोरी ले आए और एक-दो बची रह गईं, तो दादी बोल सकती है, “ये बच्योड़ा म्हारे लिए रख दे।” इसका जादू यही है—सीधी बात, बिना घुमाए। मारवाड़ी में ऐसे छोटे शब्द रोज़ के जीवन को रंग देते हैं। घणी बार एक शब्द ही पूरी तस्वीर बना देता है।
