बादळी: जब आसमान बोलने लगे
आज का मारवाड़ी-मुक्ति शब्द है बादळी, यानी बादल। जयपुर में जब दोपहर की धूप तेज हो और अचानक बादळी छा जाए, तो लगता है जैसे शहर ने एक गहरी सांस ली। मारवाड़ी में लोग बोल देते हैं, “आज बादळी घणी छाई,” और बात सीधी समझ आ जाती है। इस शब्द में सिर्फ मौसम नहीं, ठंडक भी है और थोड़ी राहत भी। गर्मियों के बीच बादळी का आना छोटी सी खुशी लगता है — छत पर बैठो, हवा तेज हो, और आसमान का रंग बदल जाए। म्हारे लिए बादळी वही पल है जब धूप को भी थोड़ा विराम मिल जाता है।
