बधावो: ससुराल भेजने का गीत
बधावो सुनते ही घर की हवा थोड़ी धीमी हो जाती है। मारवाड़ी और राजस्थानी घरों में जब बेटी ससुराल जाती है, तब जो गीत गाए जाते हैं, उन्हें बधावो कहते हैं। यह सिर्फ रोने का दृश्य नहीं होता; इसमें माँ की दुआ, घर की याद और नए घर के लिए प्यार सब एक साथ होता है। गाँव में आज भी बड़े-बुज़ुर्ग इस शब्द को बहुत अपनापन से बोलते हैं। जैसे: “बधावो में सबकी आँख भर आई।” इसका मतलब समझ लो — विदाई का वह गीत, जो दिल को छू जाए। मारवाड़ी में ऐसे शब्द सचमुच संस्कृति का सीधा रास्ता होते हैं। बधावो सिर्फ गीत नहीं, रिश्तों की नरम याद है।
