बधणों: बढ़ने वाला मारवाड़ी शब्द
आज का मारवाड़ी शब्द है बधणों — मतलब बढ़ना या आगे बढ़ना। गाँव में यह शब्द सिर्फ पौधों के लिए नहीं, ज़िंदगी के लिए भी बोल देते हैं। जब खेती में हरियाली चढ़ने लगे, या बच्चा लंबा हो जाए, तब भी लोग कह देते हैं, “अरे, यो तो घणो बध रह्यो है।” यह शब्द सीधा है, पर इसमें एक सादी-सी खुशी है। जैसे बेल का नया पत्ता, या धूप के बाद निकलती हरी घास। प्रयोग की पंक्ति: “म्हारी तुलसी रोज़ बध रही है।” बस, इतना-सा शब्द और बोलने में पूरी मारवाड़ी मिठास लगती है। मारवाड़ी-मुक्ति का असली मज़ा यही है।
