बाळी: प्यार से बोली जाने वाली बात
बाळी सुनने में हल्की सी लगती है, पर इसमें घणा प्यार छुपा होता है। मारवाड़ी में यह शब्द उस लड़की या औरत के लिए बोला जाता है जिसे अपनापन में छेड़ा जाए, बिना किसी बुरे मतलब के। जयपुर के घरों में नानी, मासी या चाची ऐसे ही बोल देती हैं। यह “सिली” जैसा है, पर नरम अंदाज़ में। प्रयोग भी सीधा है: “अरे बाळी, इतनी देर से कहाँ खो गई?” इसमें डाँट कम, लाड़ ज़्यादा है। मारवाड़ी शब्द कभी-कभी सीधे दिल तक पहुँच जाता है, और बाळी भी वैसा ही लफ्ज़ है — छोटा सा, पर घणा मिट्टी जैसा अपना।
