बीकानेर हाउस पर नाम का सवाल, कला पर बात
बीकानेर हाउस के चित्र-क्षेत्र में जो हुआ, उसने एक सीधी-सी बात को भी राजनीतिक बना दिया। एक तरफ प्रदर्शनी से कुछ तस्वीरों को हटाने का मुद्दा, दूसरी तरफ नाम को लेकर उठा सवाल। यहीं पर बात सिर्फ एक प्रदर्शन की नहीं रही, बल्कि इस पर चर्चा छिड़ गई कि किसी युवा कलाकार की पहचान कैसे पढ़ी जाती है। Rajasthan BJP की तरफ से नाम के इस्तेमाल पर एतराज़ उठा, जबकि दूसरी तरफ कला और अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात आई। बीकानेर हाउस जैसे सरकारी स्थल पर जब ऐसी तनाव भरी हलचल होती है, तो मामला गैलरी से निकल कर राजनीति के मैदान में पहुँच जाता है। एक सीधा-सा सवाल अब भी लटका है: नाम से पहचान बनती है, या पहचान से नाम?
