चांदपोल की कुंदन-पॉलिश से विरासत फिर चमकी
चांदपोल बाजार में कुंदन-पॉलिश वाली दुकानों का अलग ही रूप है। यहाँ पुराने जौहरी और कारीगर परिवार की धरोहर को संभालकर खोलते, साफ करते और फिर से जड़ते हैं। एक तरफ छोटी सी दवा जैसी पालिश, दूसरी तरफ बारीक चिमटी और रोशनी में चमकती कुंदन की झलक। कोई दुल्हन का सेट लाता है, कोई नानी के जमाने की नथ, कोई टूटा हुआ लटकन। काम बस चमक देने का नहीं होता; असली बात होती है याद को बचाना। चांदपोल के एक कारीगर ने बताया कि एक घर से आई पुरानी नथ को उन्होंने तीन दिन में ठीक किया, क्योंकि वह शादी में पहनी जानी थी। पधारो जयपुर का बाजार, यहाँ एक टुकड़ा गहना नहीं, पूरी कहानी फिर जीती है।
