चार दीवारी पर अब घंटी नहीं, गांठी बज रही
जयपुर की चार दीवारी को लोग सिर्फ पुरानी बस्ती नहीं, पूरे शहर की याद मानते हैं। इसी याद पर अब अदालत ने सीधा सवाल उठाया है: जब धरोहर के नियम बने हुए हैं, तो फिर नई दीवारें, बदले हुए मकान और बाज़ारों में फैली तारों की झाड़ी कैसे बढ़ गई? High Court ने रिपोर्ट पढ़कर कहा कि अगर अब भी सच्ची कार्रवाई न हुई, तो UNESCO स्थिति पर बात और सख्त हो सकती है। अदालत ने JDA और नगर निगम से अवैध निर्माण और अतिक्रमण का सर्वे माँगा है, और वरिष्ठ अधिकारियों से 11 बिंदुओं पर जवाब भी। गलियों में जो पुराने हवेलियाँ थीं, उनकी जगह जो आधुनिक ढाँचे आ रहे हैं, वे चार दीवारी की पहचान को धीरे-धीरे धुँधला कर रहे हैं। अब December 2026 का ज़िक्र भी साथ चल रहा है — और वह समय-सीमा, सचमुच, काफ़ी भारी लग रही है।
