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बाज़ार के किस्सेBazaar Ke Kisse

चारण-दीया नोटबुक: जयपुर की पुरानी दुकानों का काम

Charan-diya notebooks: Jaipur ki purani dukanon ka kaam

जौहरी बाजार और त्रिपोलिया की स्टेशनरी दुकानों में घणी भीड़ होती है, पर कुछ परिवार-चलित दुकानें अब भी चारण-दीया शैली की नोटबुक संभाले हुए हैं। पतली-सी दुकानें, लकड़ी की अलमारियाँ, और कागज की हल्की-सी खुशबू—बस इतना ही काफी है याद दिलाने को कि जयपुर का बाजार सिर्फ चमक नहीं, काम का भी घर है। यहाँ व्यापारियों की खाता-बही, हिसाब रखने वालों के स्कूल-जैसे रजिस्टर, और हाथ से बंधी नोटबुक अब भी मिल जाती हैं। एक पुराने दुकानदार ने बताया कि इस हफ्ते उसने 12 रजिस्टर एक ही बार में भेजे, क्योंकि पास के हिसाब-किताब वाले लोग मशीन वाली प्रति से ज़्यादा इसी बंधाई को पसंद करते हैं। सच्ची बात, पुराना कागज कभी-कभी नए से ज़्यादा टिकाऊ लगता है।

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