चोखी ढाणी में गाँव का रंग, जयपुर के पास
चोखी ढाणी में जैसे ही अंदर पाँव रखते हो, शहर का शोर धीरे धीरे पीछे छूट जाता है। कच्ची मिट्टी के आँगन, रंग-बिरंगी झोपड़ियाँ, चूल्हे की आग और ढोल की थाप मिलकर गाँव जैसा माहौल बना देते हैं। यहाँ बाजरे की रोटी, गट्टे की सब्जी, चूरमा और छाछ की खुशबू हर मोड़ पर मिलती है। असली मजा तब आता है जब भोपों की बोली, कालबेलिया और घूमर के साथ लोक कला ज़िंदा लगती है। झूला हो, हाथ की चूड़ी हो या ऊँट की सवारी — सब कुछ धीरे चलने को कहता है। घणी देर तक यहाँ घूम कर लगता है कि जयपुर के पास ही राजस्थान का एक छोटा सा जीता-जागता गाँव बस गया है।
