कांग्रेस की अंदरूनी खिचड़ी फिर गरम
राजस्थान कांग्रेस के अंदर का तनाव एक बार फिर सामने आ गया है। शहरी निकाय के नतीजों के बाद जो नाराज़गी दब-सी गई थी, वह अब सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिये बाहर आ गई। इस बार निशाना संगठन की शीर्ष पंक्ति पर था, और भाषा में सीधापन भी था और चुभन भी। मुद्दे की जड़ सिर्फ एक पोस्ट नहीं, बल्कि वह पुराना सवाल है जो हार के बाद और तेज़ हो जाता है — ज़िम्मेदारी कौन लेगा, और सुधार की शुरुआत कहाँ से होगी। पार्टी के अंदर की इस ख़ामोशी पर एक तीखी पंक्ति भी पड़ी: लोग अब बस बयान नहीं, बदलाव देखना चाहते हैं। जयपुर से लेकर ज़िला स्तर तक, कार्यकर्ताओं के बीच यही बात चल रही है कि जब नियंत्रण और सुनवाई कम दिखे, तो नाराज़गी अपनी ज़ुबान खुद ढूँढ लेती है। और इस बार वह ज़ुबान काफ़ी सख़्त निकली है।
