कांग्रेस की जड़ता पर बीजेपी का ताना, कार्यकर्ताओं पर फोकस
राजसमंद में हुई बैठक का माहौल सीधा और कामकाजी था। पार्टी ने कांग्रेस की अंदरूनी टूट-फूट पर टिप्पणी की, लेकिन उसी सांस में अपने संगठन को मजबूत दिखाने की कोशिश भी की। यहां बात सिर्फ नाराज़गी की नहीं थी; संदेश था कि जहां कार्यकर्ता सक्रिय हैं, वहां पार्टी का धागा भी जुड़ा रहता है। बैठक में यह भी कहा गया कि जो लोग अब तक किसी ज़िम्मेदारी से दूर रहे हैं, उन्हें भी सही समय पर मौका मिलेगा। यानी संगठन में पंक्ति लंबी है, और सबको अपनी बारी का इंतज़ार है। पंचायत चुनाव से पहले यह संकेत काफ़ी सीधा है: काम करने वाले ही आगे आएंगे, और हर इलाके की शिकायत सुनी जाएगी। जयपुर से राजसमंद तक, यह वही पुरानी राजनीतिक बात है — कुर्सी से पहले कैडर, और कैडर से पहले भरोसा।
