कांग्रेस की टिकट-खिचखिच पर बीजेपी ने ली छोटी सी चोट
जयपुर में टिकट बांटने के बाद कांग्रेस के भीतर जो तनाव उभरा, उसने राजनीतिक गपशप को एक नया मोड़ दे दिया है। बीजेपी ने इसी मौके को पकड़कर कहा कि जब पार्टी के अपने लोग ही एक सुर में न हों, तो बाहर वाले क्या सोचेंगे। यह बात सुनने में सीधी लगती है, पर स्थानीय निकाय चुनाव के समय इसका असर और भी गहरा हो जाता है। बीजेपी का पूरा जोर इस बात पर था कि उनके यहां संगठन व्यक्ति से बड़ा है। मतलब, टिकट मिले या न मिले, काम रुकता नहीं। इसी के साथ कांग्रेस पर यह सवाल भी उठाया गया कि महिला सशक्तीकरण के नारे और अंदर की टिकट राजनीति में कितनी दूरी है। जयपुर के राजनीतिक माहौल में इस तरह की खींचतान मतदाता को सीधा संकेत देती है: लोग अब विकास, अनुशासन और साफ टीमवर्क देखना चाहते हैं। और इस बहस का असर मतपेटी तक कैसे पहुंचता है, वही असली परीक्षा होगी।
