कोर्ट से पहले demolition, जयपुर फिर उलझन में
जयपुर में सड़क चौड़ी करने का दृश्य नया नहीं है, पर इस बार बात और सीधी लग रही है। अदालत का निर्णय आने से पहले demolition कर देना लोगों को वही पुरानी याद दिला रहा है, जब काम अधूरा भी रहा और गुस्सा भी बढ़ा। गली के मोड़ पर खड़े लोग कह रहे थे — पहले फ़ैसला, फिर हथौड़ा; वरना बाद में वही पुरानी उलझन, बस नया रंग। इस तरह की जल्दबाज़ी से न केवल घरों के कोने हिलते हैं, बल्कि भरोसा भी डगमगाता है। सड़क चौड़ी करना ज़रूरी हो सकता है, पर प्रक्रिया साफ़ हो तो ही सबको समझ आता है। वरना जयपुर की रोज़मर्रा ज़िंदगी में एक और जानी-पहचानी पंक्ति जुड़ जाती है: काम हुआ, पर सुकून गया। ऐसे फ़ैसले शहर को आगे ले जाने के बजाय बार-बार वही पुरानी फ़ाइल खोल देते हैं।
