ड्रग्स के खिलाफ मुहिम, पंजाब के भविष्य पर बात
नशे के खिलाफ बात अब सिर्फ सरकारी पंक्ति नहीं, घर की चिंता बन रही है। राजस्थान के मुख्यमंत्री ने इस मुहिम को पंजाब के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि उसे बचाने के लिए समाज का साथ ज़रूरी है। उनकी बात का सीधा मतलब यही था कि जब माताएँ, बहनें और जवान एक ही पंक्ति में खड़े होते हैं, तब संदेश कहीं ज़्यादा दूर तक जाता है। राजस्थान में भी प्रवेश पर रोक, निगरानी और संपत्ति-स्तर की कार्रवाई जैसी बातें चल रही हैं। यानी ध्यान सिर्फ बोलने पर नहीं, नशे से जुड़ी आपूर्ति-श्रृंखला को तोड़ने पर है। जयपुर के गली-मोहल्ले में भी लोग ऐसे अभियानों को तभी गंभीरता से लेते हैं जब उन्हें स्कूल, बस्ती और बाज़ार के स्तर पर असर दिखे। एक स्थानीय-सी बात यही है: बात तब पक्की लगती है जब उसमें घर की फिक्र और समाज की ज़िम्मेदारी दोनों साथ हों।
