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विदेश नीति घर की चाय नहीं, सीधी बात

Foreign policy par ghar ki chai nahi, seedhi baat

विदेश नीति की बात आज एक व्यंग्यात्मक दैनिक-डाइजेस्ट अंदाज़ में फिर से सामने आई। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने राहुल गांधी के बयानों का समर्थन करते हुए कहा कि कूटनीतिक मामले हल्का मुद्दा नहीं होते; इन्हें पूरी गंभीरता से लेना चाहिए। उनका सीधा कहना था कि भारत को किसी भी देश का अधीनस्थ अनुयायी नहीं बनना चाहिए, चाहे सामने वाली ताकत कितनी भी बड़ी हो या अपनी जरूरत कितनी भी तेज़ हो। इस बात का रंग तब और गहरा होता है जब आज के वैश्विक दृश्य में हर देश अपनी जगह और अपना लाभ देख रहा है। जयपुर के चाय-स्टॉल वाले अंदाज़ में कहें तो, दुनिया की मेज़ लंबी है, पर कुर्सी किसी की पक्की नहीं। इसी लिए विदेश नीति पर बोल सिर्फ सुर्खी नहीं, एक सोच का संकेत होता है। अब देखना यह है कि इस सीधे, थोड़े तीखे संदेश को सरकारी पक्ष से कैसे पढ़ा जाता है।