गलता जी की सीढ़ियाँ और ठंडे कुंड
गलता जी में पहला एहसास सीढ़ियों का होता है: नीचे जयपुर, ऊपर गुलाबी पहाड़ियाँ और बीच में पत्थर की तंग चाल। चढ़ाई के साथ हवा ठंडी होती जाती है, और देवड़ियों के रंग धूप में और गहरे लगते हैं। यहाँ के ताजे पानी के कुंड सबसे खास हैं—पत्थर की दीवारों के बीच जमा पानी, जिसमें आसमान भी हल्का सा नीला दिखता है। म्हारे हिसाब से यह जगह सिर्फ मंदिर नहीं, एक पहाड़ी सैर है जहाँ हर मोड़ पर नया दृश्य मिलता है। बंदरों की चंचल हरकत अलग, पर असली आकर्षण है नीचे से ऊपर तक बिखरा सुकून। शाम को जब रोशनी छत की दीवार पर पड़ती है, तब गलता जी का रंग और निखरता है। एक बार पधारो, फिर जयपुर का यह कोना याद रह जाता है।
