हर कोने का अपना कुल्हड़ किंग
जयपुर की चाय टपरी पर सुबह से शाम तक एक छोटा सा राज चलता है। हर गली, चौक और मोड़ पर कोई न कोई कुल्हड़ वाला अपनी पहचान बना लेता है। कहीं चाय कड़क मिलती है, कहीं अदरक ज़्यादा, और कहीं मलाई की पतली परत ही सबका मन जीत लेती है। सच्ची, यही तो जयपुर है — टपरी पर बात छोटी होती है, पर आदत बड़ी। म्हारे शहर में लोग चाय के लिए सिर्फ प्यास से नहीं, पक्की पसंद से भी निकलते हैं। एक टपरी का कुल्हड़ इतना मशहूर हो जाता है कि दोस्त उसी के नाम से मोड़ ले लेते हैं। इसी लिए हर कोने का अपना कुल्हड़ किंग होता है — और उस किंग के लिए लोग थोड़ा सा चक्कर, थोड़ा सा इंतज़ार, और पूरा मूड सब कुछ दे देते हैं।
