हवा महल की जाली और ठंडी हवा
हवा महल के सामने खड़े होते ही पहली चीज़ नज़र को पकड़ती है — लाल और गुलाबी पत्थर की वह झरोखा दीवार, जिसमें छोटी-छोटी खिड़कियाँ हवा को अंदर आने देती हैं। पुराने ज़माने में यह महल राजपूत रानियों के लिए बना था, ताकि वे पर्दे के पीछे से बाज़ार और जुलूस देख सकें। आज भी यह जगह उसी काम की लगती है। नीचे सिरेह देवरी बाज़ार की भागदौड़, ऊपर हल्की सी ठंडक, और बीच में घणी सच्ची जयपुर वाली हवा। म्हारे हिसाब से इससे सुंदर लोगों को देखने की जगह मुश्किल से मिलेगी — चाय की चुस्की, घंटियों की आवाज़, और सेल्फी लेने वाले लोगों का आना-जाना। जो किसान का बेटा 17 मिनट रुकता है, वह यहीं सुबह के समय अपने गाँव से आकर हवा और नज़ारा दोनों का सुख लेता है।
