जयपुर हवाई अड्डे पर मॉक ड्रिल, व्यवस्था की तैयारी परखी गई
जयपुर हवाई अड्डे के टर्मिनल 1 पर हुई मॉक ड्रिल का मकसद सिर्फ अभ्यास नहीं था, बल्कि पूरी व्यवस्था की तैयारी परखना था। बम धमकी जैसी स्थिति में सबसे पहले लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना होता है, फिर हर टीम को अपनी भूमिका समझनी होती है। CISF ने इसी क्रम को परखा, और पुलिस, IB, ATS तथा हवाई अड्डा कर्मचारियों के साथ समन्वय भी देखा। ऐसी ड्रिल का काम होता है कि वास्तविक आपात स्थिति आने से पहले हर कदम साफ हो जाए — कौन संकेत देगा, कौन मार्ग संभालेगा, और कौन भीड़ को दिशा देगा। हवाई अड्डे जैसी जगह पर एक छोटी-सी देरी भी बड़ी बात बन सकती है। इसलिए ऐसी तैयारी, भले ही नियमित लगे, असल में सुरक्षा की रीढ़ होती है। सच्ची बात यही है: जब ड्रिल सुचारु होती है, तभी असली समय पर लोगों का भरोसा बना रहता है।
