जयपुर ब्लास्ट केस: सुप्रीम कोर्ट ने जमानत क्यों रोकी
जयपुर सीरियल बम धमाका मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख बिलकुल सीधा रहा। 2008 के उस मामले में आजीवन कारावास का सामना कर रहे दो लोगों की रिहाई की मांग पर अदालत ने कहा कि इसे आम जमानत जैसा नहीं देखा जा सकता। अदालत के हिसाब से यहाँ सवाल सिर्फ कानून की फाइल का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और जनता की सुरक्षा का भी है। यही वजह है कि जमानत पर दरवाज़ा बंद रहा। कानूनी भाषा में ऐसे मामलों में अदालत पहले पूछती है: क्या मामला इतना गंभीर है कि रिहाई से बड़ा नुकसान हो सकता है? इस बार जवाब हाँ की तरफ गया। जयपुर जैसे शहर के लिए यह याद दिलाता है कि धमाका मामले का असर सिर्फ न्यायालय तक सीमित नहीं रहता, उसकी छाप लंबी चलती है। अदालत ने जो एक पंक्ति में बताया, उसका मतलब यही था: यह साधारण फाइल नहीं, घणा गंभीर मामला है।
