जयपुर जेल में अंडरट्रायल की मौत, सवाल फिर उठे
जयपुर जेल में हुआ यह वाकया सिर्फ एक खबर नहीं, एक भारी खामोशी भी है। अंडरट्रायल कैदी की मौत के बाद जेल की दिनचर्या अचानक रुक सी गई, और दीवार, दरवाज़ा, और अंदर की सख्त हवा सब कुछ और भारी लगने लगा। जेल जैसे बंद दायरे में एक इंसान का आख़िरी कदम व्यवस्था पर सीधा सवाल छोड़ जाता है। मौके पर जो नोट मिला, उसी ने बात को और गहरा कर दिया। नोट में लिखी बात ने इशारा दिया कि अंदर किसी ने अपनी तकलीफ़ को शब्दों में बंद कर दिया था। अब असली चर्चा यह है कि ऐसे माहौल में निगरानी की ज़िम्मेदारी कितनी मज़बूत थी, और समय पर सहारा क्यों न मिल सका। घणी सख्त जगह में भी इंसानी देखभाल की ज़रूरत कम नहीं होती — और यही बात सबसे ज़्यादा चुभ रही है।
