जयपुर जेल की तलाशी में मोबाइल मिला — अब 3 करोड़ फंड का लिंक
जयपुर केंद्रीय कारागार में हुई तलाशी ने एक छोटा-सा उपकरण और बड़ा-सा सवाल, दोनों सामने रख दिए। तलाशी के दौरान मोबाइल फोन मिलने के बाद अब ध्यान इस पर है कि यह फोन किसके उपयोग में था और उसमें सुरक्षित संपर्क किस ओर इशारा करते हैं। कारागार के भीतर मोबाइल का मिलना अपने-आप में व्यवस्था की एक सख्त याद दिलाता है — बंद दीवारों के बीच भी संकेत की कोशिश रुकती नहीं। अब जाँच का मुख्य बिंदु फोन का स्रोत और 3 करोड़ फंड मामले से उसका संभावित संबंध है। ऐसे मामलों में नंबरों की सूची, कॉल का पैटर्न और हाल की गतिविधि ही असली सुराग बनते हैं। एक पुलिस सूत्र के अनुसार, छोटी-सी चीज़ कभी-कभी पूरी कड़ी का रास्ता खोल देती है। जयपुर के लिए यह मामला एक और याद दिलाता है कि कारागार सुरक्षा केवल ताले और दरवाज़े से नहीं, पूरी निगरानी से चलती है।
