जयपुर के 300 साल, पर जश्न का आकार अभी बाकी
जयपुर अपने 300 वर्ष के पड़ाव के करीब है, और इसी के साथ शहर में एक पुरानी-सी गुनगुनाहट फिर सुनाई दे रही है। गलियों, बाजारों और चौराहों पर लोग यही सोच रहे हैं कि इतने बड़े अवसर पर जश्न का अंदाज़ कैसा होगा। अभी तक उत्सव योजना का अंतिम आकार सामने नहीं आया है, इसलिए बात सिर्फ तैयारी की नहीं, उम्मीद की भी है। क्या कोई बड़ा सार्वजनिक आयोजन होगा, क्या विरासत को केंद्र में रखा जाएगा, या फिर उत्सव को अधिक स्थानीय और सरल रखा जाएगा — ये सब सवाल अभी हवा में हैं। एक छोटी-सी शहरी टिप्पणी भी यहीं घूम रही है: पहले रंग तय हो जाए, फिर रोशनी अपने आप आ जाएगी। जयपुर के लिए 300 साल सिर्फ संख्या नहीं, एक याद, एक पहचान और एक नया मौका है। अब देखना यह है कि इस पड़ाव को शहर अपनी भाषा में कैसे मनाता है।
