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जयपुर के पत्तल पर खाना क्यों और स्वाद लगता है

Jaipur ke pattal par khana kyon aur swaad lagta hai

जयपुर की गलियों में पत्तल पर खाना देखकर लगता है कि स्वाद सिर्फ ज़ुबान पर नहीं, नज़र पर भी चढ़ जाता है। छोटी सी ठेली हो या मोहल्ले का नाश्ता, पत्ते की प्लेट या कागज़ की प्लेट पर परोसा हुआ पूरा थाल ज़्यादा अपना-सा लगता है। इसका एक कारण है गरम खाने का स्वभाव: कचौरी, दाल-बाटी, पूरी या छोले जब सीधे पत्तल पर आते हैं, तो उनकी खुशबू तेज़ महसूस होती है। दूसरा कारण है जयपुर की रोज़ की आदत—लोग सीधी, साफ़ और जल्दी वाली परोसाई पसंद करते हैं। घणी जगह चाँदी की थाली नहीं, पत्तल ही माहौल बना देता है। और सच्ची बात, हाथ से खाना भी थोड़ा और धीरे, थोड़ा और ध्यान से खिलाता है।

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