जयपुर की नीली कारीगरी: एक रंग, पहचान
ब्लू पॉटरी जयपुर को वह पहचान देती है जो दीवार पर लगे एक छोटे से टुकड़े से भी महसूस हो जाती है। सांगानेर और आसपास के कारीगरों ने इस कला को इतना सँभाला कि आज यह सिर्फ़ चीज़ नहीं, शहर की याद बन गई है। इसकी चमक, नीला रंग और फूल-पत्ती वाले नक्काशीदार नमूने घर से लेकर बाज़ार तक अलग सा रंग भर देते हैं। सच्ची, घणी नाज़ुक होती है यह कारीगरी; एक ग़लत पकड़ और सब बिगड़ सकता है। फिर भी जयपुर ने इस नाज़ुक कला को अपनी आदत बना लिया। पधारो जयपुर का एक मतलब यही भी है—यहाँ रंग सिर्फ़ देखे नहीं, सँभाले जाते हैं।
