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जयपुर बोलेJaipur Bole

जयपुर की ब्लू पॉटरी, हाथ का निशान

Jaipur ki blue pottery, haath ka nishaan

जयपुर की ब्लू पॉटरी में सबसे खास बात यह है कि वह पूरी तरह एक जैसी नहीं होती, फिर भी सबसे याद रह जाती है। सांगानेर और आसपास के कारीगर मिट्टी, क्वार्ट्ज और चमकदार परत को ऐसे मिलाते हैं कि हर कटोरी, टाइल और सुराही में थोड़ा अपना-सा रूप रह जाता है। मशीन सामान बना देती है, पर यहाँ हर चीज़ में हाथ का हल्का सा निशान रह जाता है। घणी दुकानों में चमक देखकर लगता है जैसे रंग खुद थोड़ा रुक कर बैठ गया हो। मारवाड़ी में कहें तो, इसमें सच्ची मेहनत दिखती है। जब घर की दीवार पर नीली पॉटरी की एक छोटी टाइल लगती है, तो वह सिर्फ सजावट नहीं रहती; जयपुर की धीमी, साफ, और हाथ से बनी आदत बन जाती है। बस इतना ही।