जयपुर की दीवार, यूनेस्को का सवाल
जयपुर की वॉल्ड सिटी का रंग, नक्शा और रास्ता ही उसे अलग बनाते हैं। इसी वजह से उच्च न्यायालय ने विरासत को लेकर साफ बात कही: अगर अवैध निर्माण, अतिक्रमण और कमजोर संरक्षण ऐसे ही चलते रहे, तो यूनेस्को दर्जे पर भी खतरा आ सकता है। यह सिर्फ कागजी चिंता नहीं, बल्कि रोज़ के शहर का सवाल है। गलियों में बढ़ती नई दीवारें, तंग होते रास्ते और विरासत नियमों का ढीला पालन मिलकर पुराने शहर की सांस को दबाते हैं। अदालत की बात का मतलब भी यही था — विरासत को बचाना सिर्फ विभाग का काम नहीं, पूरे शहर की ज़िम्मेदारी है। एक स्थानीय कहावत में कहें तो, पहले संभालो, फिर सजाओ। जयपुर को दुनिया इसी विरासत के लिए जानती है। अगर योजना और निगरानी साथ न चले, तो नुकसान सिर्फ इमारत का नहीं होता, पहचान का होता है।
